Guru Nanak Dev Ji । गुरु नानक देव जी

Hello अपने Title तो देख लिया ही होगा आज किसकी  बात होने वाली है । आज  हम बात करने जा रहे एक महान व्यक्ति के बारे में जिनका नाम है Guru Nanak Dev Ji और आज इनके बारे में बात करेंगे । कभी ना कभी तो इनका अपने प्रसाद खाया है गा । तभी आप लोग इस पोस्ट पर आ टपके हो तो जानते है । इनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी तो बने रहो हमरे साथ

गुरु नानक देव जी जीवनी

Guru Nanak Dev Ji

एक महान पुरुष थे । को शिख़ धर्म के संस्थपक है । सिख धर्म के लोग आज भी इनको पूजते है है । सिख धर्म के यही एक मात्र सबसे पहले गुरु है ।  जिन्होंने सिख धर्म की स्थापना सबसे पहले की थी । इनको जितने भी गुरु है । सब गुरुओं से बड़ा भी माना जाता है ।

इनका नाम 15 अप्रैल की 1469 ई में बताया जाता है कार्तिक की पूर्णिमा को हुआ था । इनका जन्म हिंदू परिवार में ही हुआ था । इनके पिता के नाम कालू चन्द और माता का नाम तृप्ता देवी यह जहा Guru Nanak Dev Ji रहते थे उस गांव का नाम तलवंडी था जो रावी नदी को पास मै है ।

GURU Nanak Dev JI । गुरु नानक देव जी

तलवंडी पाकिस्तान में पड़ता है । जिसको तलवंडी sabo कहते है । यह कहा जाता है Guru Nanak Dev Ji नाम नानक से बड़े हो कर ननकाना पड़ गया यह माना जाता है कि इनकी बौद्ध शक्ति बहुत तेज थी । इनका मा पढ़ाई में नहीं लगता था जिससे इनके माता पिता को चिंता सताने लगी ।

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यह बचपन से ही किसी भी काम को करते समय पूरा मन और तन को पूरा लगा देते थे । जा बचपन मै सब खेलने जाया करते थे टीम । Guru Nanak Dev Ji अपनी आंखो को बंद करके वह चिन्तन में खो जाते थे । इन सब को देखते देखते इनके माता पिता और जाता इनकी चिन्ता करने लगे । माना जाता है कि गांव में कुछ चमत्कारिक घटना होने के  कारण Guru Nanak Dev Ji के गांव वाले इनको दिव्य शक्ति  ( भगवान ) का रूप मानते थे ।  और है  Guru Nanak Dev Ji की बहन का नाम नानकी था ।

Guru Nanak Dev Ji की शिक्षा

इनको जब पढ़ाई के लिए एक पंडित हरदियाल नाम के  एक शिक्षक के पास इनको शिक्षा लेने के लिए भेजा गया । Guru Nanak Dev Ji अपने अध्यपक से कोई प्रश्न पूछा करते थे ।  जिसका उत्तर खुद शिक्षक पंडित हरदियाल को नहीं पता था । इनके प्रश्नों का उत्तर ना मिलने के कारण इनका स्कूल छूट गया । शिक्षा इनको ऐसा मानता था जैसे कि इनको भगवान के Guru Nanak Dev Ji को खुद पढ़ा कर भेजा है । फिर नानक जी को एक मौलवी के पास भेजा गया

जिसका नाम था कुतुबद्दीन पर यह पर भी नानक जी के प्रश्नों का उत्तर नहीं मिला फिर उन्होंने पढ़ाई को त्याग दिया । एक बार इनके पिताजी ने किनो घोड़ों का व्यापार करने के लिए कुछ पैसे दिए गुरु नानक देव जी ने उन पैसे को सदू संत में कि सेवा में लगा दिए ।

जिससे इनके पिता जी नाराज हुए फिर इनके पिता जी ने सोचकी इनको क्यो ना कृषि आदि मै लगाया जाए । शायद यह उस काम को सभाल के इनको कृषि में लगा दी । गुरु नानक देव जी से कृषि का काम भी नहीं संभाल गया है । इन पर भरोसा करने बाली इनकी बहन जिनका नाम नानकी था और राय बुलर गांव के मुख्या थे ।

गुरु नानक देव जी का परिवार

आए इनके परिवार के बारे में जानते है । कोन कोन है इनके परिवार में । इनके माता पिता और बहन का नाम तो आपको में उपर बता दिया है । पहले इनके विवाह के बारे में बताते है । Guru Nanak Dev Ji का विवाह 16 वर्ष की आयु में गुरदासपुर के बटाला में रहने वाली सुलक्खनी नाम कि एक लड़की से हुआ था । और इनकी शादी को कभी दिन बाद यानी कि 32 साल के बाद इनके घर में एक लड़का पैदा हूं ।

जिसका नाम था श्री चंद यह नाम इनके पहले पुत्र का है । जिन्होंने आगे चलकर  उदासी संप्रदाय की इस्थपना की । फिर और चार साल के बाद Guru Nanak Dev Ji के घर में दूसरे पुत्र ने जन्म लिया जिसका नाम था लखमीदास । बहुत दिन के बाद Guru Nanak Dev Ji अपने बहनोई के पास चले गए थे और बह पर जाकर पूरी ईमानदारी से उन्होंने काम किया और पैसे क्या वह पर उन्होंने जितना भी पैसे कमाएं उसका कुछ हिस्सा सदू संत की सेवा में लगा देते थे ।

गुरु नानक देव जी ने घर कब छोड़ा

सिख धर्म के ग्रंथों के अनुसार यह कहा जाता है कि Guru Nanak Dev Ji रोज बोई नाम कि नदी में स्नान किया करते थे । और एक दिन स्नान करते समय परमात्मा जी ने इनको अमृत पिलाया और यह भी कहा था । कि में तुम्हारे साथ हूं । और जो भी तुम्हारी शरण में आयेगे वह सभी खुश और सुखी रहगे ।

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और भिर Guru Nanak Dev Ji ने 1507 में अपने चार साथियों के साथ तीर्थ यात्रा पर निकल गए । इनके चार साथीयों के नाम थे  । पहले साथी का नाम था रामदास और दूसरे का था लहना और तीसरे का बाला और चोथे बले का नाम था मर्दाना यह चार इनके साथी थे । और बहुत सारी तीर्थ यात्रा करने के बाद यह करतारपुर में रहने लगे । यह करतारपुर में 1521 से 1539 तक रहे ।  इन्होन गरीबों और साधु संत में इन्होंने दान धर्म भी किया ।

लंगर प्रथा किसने शुरू की

आए यह भी जानते है कि । लंगर की प्रथा किसने चलाई अगर आप कभी पंजाब गए होगे ती वहा पर देखा होगा कि लग्गर लगा लगे सब को खनना खिलाते है । मुझे तो मै पता है में तो पंजाब मै ही रहा हूं इसलिए अपको पता है तो जरूर बताना कॉमेंट करके ।

लंगर प्रथा किसने शुरू की

लंगर को सबसे ज्यादा पंजाब में ही खबाया जाता है । लंगर की स्थापना भी Guru Nanak Dev Ji ने है करी थी । यह प्रथा को इस लिए बनाया गया था कि जात पात को खतम करके सब एक सामना खाना खाए । चाहे कोई कितना भी गरीब हो या अमीर वह सब एक पंक्ति में ही लंगर को चखा करते है । Guru Nanak Dev Ji को सिख लोग और भी बहुत लोग इनके जन्म को बहुत दम धाम से मनाते है ।

गुरु नानक देव जी की मृत्यु कब होई

Guru Nanak Dev Ji आए जानते है कि गुरू नानक देव जी की मृत्यु कब और कैसे होई थी । यह कहा जाता है कि जब गुरू नानक देव जी के अंतिम समय चल रहा था तो हिन्दू समाज और सिख धर्म और मुस्लिम धर्म के लोग यह सोच रहे थे कि इनको मृत्यु के बाद में इनके शरीर का अंतिम संस्कार कोन करेंगे । यह सोच सोच कर हिंदू मुस्लिम और सिख सब परेशान थे ।

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इसी सवाल के जवाब के लेने के किए सब धर्म के लोग उनसे पूछने चले गए की उनका अंतिम संस्कार कोन से धर्म या कोन करेगा । Guru Nanak Dev Ji यह ने कहा कि आप मेरे एक हाथ में मुस्लिम लोग फूल रख देने और दूसरे हाथ में हिंदू लोग फूल रखा देना और जिसने भी फूल नहीं मुरझाते ओ मेरा अंतिम संस्कार कर लेना ।आप सोच रहे होगे कि सिख धर्म के लोगे ने कहा पर फूल रखे होंगे ।में आपको बता दू सिख धर्म हिन्दू धर्म में ही आता है ।

फिर सबने एसा ही किया जब Guru Nanak Dev Ji की 1539 ई  मृत्यु होई तो उन्होंने ऐसा ही किया मुस्लिमों ने एक तरफ फूल को रखा और एक तरफ हिंदू धर्म के लोगे ने फूलो को रखा । और सुबह को सब लोग उनके शरीर के पर गए । और देखा की किसी के भी फूल नहीं मुरझाए है मगर उनका मृत शरीर वहां पर नहीं था । इनकी मृत्यु के बाद उन्होंने अपने शिष्य को जिसका नाम भाई लहना था । उसको अपना उत्तराधिकारी बना दिया था ।  जिनको आज हम गुरु अंगद देव के नाम से जानते हैं

गुरु नानक देव जी का उद्देश्य

Guru Nanak Dev Ji का यही उद्देश्य रहा की सब लोग मिल जुल कर रहे । और एकता बनाए रह । और दान धर्म करते रहे । ग़रीबी को खाना खिलाएं । और ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे किसी को परेशानी का सामना करना पड़े । वैसे तो गुरू नानक देव जी की जितनी तारीफ करो काम है वह महन व्यक्ती थे । सबको एक समान देखा करते थे

Guru Nanak Dev Ji image

Guru Nanak Dev Ji से जुड़े कुछ सवाल

इनसे जुड़े कुछ  सवालो के बारे में हम आपको बताते है आए जानते है । इनसे जुड़े कुछ सवालों के बारे में । जो कि अपको जरूर जानने चाहिए और यह सवाल अक्सर हमरे सामने आते रहे है और इन सवालों का जवाब हमे नहीं पता होता है  । तो जानते है इनसे जोड़े कुछ सवालों को बारे में  पहला सवाल यह है जो कि आप लोग नीचे देख रहे है

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गुरु नानक देव जी का जन्म कब हुआ?

गुरु नानक देव जी का जन्म विकिपीडिया के अनुसार 15 अप्रैल 1469 ई को होया था। मगर कोई कहता है इनका जन्म 29 नवंबर 1469 को होया था ।

 

लंगर प्रथा किसने शुरू की

लंगर प्रथा गुरु नानक देव जी ने किसने शुरू करती थी । जिसमे एक पंक्ति में बिठाकर सब को एक समान भोजन खिलाया जाता है । चाहे वह कितना भी गरीब हो चाहे वह कितना ही अमीर हो

 

गुरु नानक देव जी के उत्तराधिकारी कौन बने?

गुरु नानक देव जी के गुरु नानक देव जी के उत्तराधिकारी जैसे  कि मैंनेेेेेे आपको ऊपर बता रखा है । गुरु नानक देव जी की मृत्यु के बाद उनकेे शिष्य भाई लहना उनके उत्तराधिकारी बने।

गुरु नानक देव के विषय में आप क्या जानते हैं?

Guru Nanak Dev Ji के बारे में को भी हम जानते है । ओ सब हमने इसमें बता दिया है इसको आप पढ़ के पता कर सकते है । इस पोस्ट मै गुरू नानक देव जी से जुड़ी सारी कहानी को बताने को किसी करी गई है

गुरु नानक की मृत्यु कब हुई?

हमने आपको उपर बताया है कि गुरु नानक देव जी की मृत्यु कब हुई । आप उपर उसको पढ़ कर जान सकते है  नानक देव जी की मृत्यु 1539 ई में हुई

गुरु नानक देव के माता पिता का क्या नाम था?

गुरु नानक देव के माता पिता का क्या नाम था? यह भी हम आपको बता रहे है । आए जानते होंगे गुरू नानक देव जी के पिता जी का नाम Guru Nanak Dev Ji के पिता का नाम लाला कल्याण राय था

Guru Nanak Dev Ji आर्टिकल कैसा लगा

अगर इस पोस्ट में कोई ग़लती होई है तो उसके लिए में आप से माफी मांगता हूं । अगर किसी वजह से इसमें ग़लती है तो आप मुझे बता सकते इसको सुधारने की मा पूरी कोशिश करुगा । इस  Artical की जानकारी कैसी लगी यह बताना ना भूले । और अगर आपके पास भी है कोई Artical तो अप उसे हमारे साथ साझा कर सकते है

 

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